एक जादुई टोपी

एक समय की बात है, एक गरीब किसान था, जिसका नाम रामू था। रामू बहुत ही मेहनती था, लेकिन उसकी किस्मत खराब थी। उसके पास खेत तो था, लेकिन उसमें पैदावार बहुत कम होती थी। इसलिए वह हमेशा कर्ज में डूबा रहता था।

एक दिन, रामू जंगल में लकड़ी काट रहा था। तभी उसे एक जादुई टोपी मिली। टोपी बहुत ही सुंदर थी और उस पर चमकदार पत्थर लगे हुए थे। रामू ने टोपी पहनी और उसे अपने सिर पर रख लिया।

जैसे ही रामू ने टोपी पहनी, उसकी किस्मत बदल गई। उसके खेत में पैदावार बढ़ गई। वह कर्ज से मुक्त हो गया और उसके पास बहुत सारा पैसा हो गया।

रामू बहुत खुश था। वह सोचने लगा कि अब वह दूसरों की मदद कर सकता है। उसने अपने गाँव के सभी गरीबों की मदद की। उसने उन्हें भोजन, कपड़े और पैसे दिए।

एक दिन, रामू के गाँव में एक बुजुर्ग महिला आई। वह बहुत बीमार थी और उसे कोई इलाज नहीं मिल रहा था। रामू ने बुजुर्ग महिला की मदद की और उसे एक अच्छे डॉक्टर के पास ले गया। डॉक्टर ने बुजुर्ग महिला का इलाज किया और वह ठीक हो गई।

बुजुर्ग महिला रामू की मदद के लिए बहुत आभारी थी। उसने रामू को कहा, “तुम एक बहुत ही दयालु व्यक्ति हो। तुमने मेरी मदद की, इसलिए मैं तुम्हारी मदद करना चाहती हूँ।”

बुजुर्ग महिला ने रामू को एक जादुई पत्थर दिया। उसने कहा, “यह पत्थर बहुत ही शक्तिशाली है। यह किसी भी व्यक्ति के दुख को दूर कर सकता है। लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।”

रामू ने बुजुर्ग महिला का धन्यवाद किया और जादुई पत्थर को अपने पास रख लिया।

रामू ने जादुई पत्थर का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए किया। उसने कई लोगों के दुखों को दूर किया। लेकिन जैसे-जैसे वह दूसरों की मदद करता गया, वह खुद भी दुखी होने लगा। उसे लगने लगा कि वह दूसरों की मदद के लिए अपने खुद के दुखों को भूल रहा है।

एक दिन, रामू ने सोचा कि अब वह जादुई पत्थर का इस्तेमाल नहीं करेगा। उसने जादुई पत्थर को किसी सुनसान जगह पर फेंक दिया।

जादुई पत्थर के बिना, रामू का जीवन फिर से मुश्किल हो गया। लेकिन इस बार, वह खुश था। क्योंकि वह अब दूसरों की मदद के लिए अपने खुद के दुखों को नहीं भूल रहा था।

नैतिकता:

दूसरों की मदद जरूर करनी चाहिए, लेकिन बिना स्वार्थ के। अगर हम दूसरों की मदद करने के लिए अपने खुद के दुखों को भूल जाएंगे, तो हम खुद भी दुखी हो जाएंगे।